Tuesday, 24 May 2016

Geospatial map of India

Geospatial regulation bill 2016”
हाल ही भारत सरकार द्वारा “geospatial regulation bill 2016” नामक कानून को लाने जा रही है, इस कानून के आ जाने से भारतीय मानचित्र के साथ उसके प्रकाशन, प्रदर्शन, उपयोग में किसी भी प्रकार की छेड़-छाड़ अगर की गयी तो शख्त कानून के तहत कार्यवाही की जाएगी, जिसमे 100 करोड़ रूपये तक का जुर्माना अथवा 7 तक की जेल भी हो सकती है, अगर ये विघेयक कानून बन जाता है तो किस प्रकार से यह आंतरिक अथवा अन्तराष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव डालेगा, इससे पहेले जानते है आखिर ये कानून है क्या? और क्यों इसकी जरूरत पड़ी ...
Geospatial- का अर्थ है उपग्रह, विमानों, गर्म हवा के गुब्बारों आदि द्वारा एकत्रित की गयी जानकारी को मानचित्र के रूप में संकलित एवं प्रदर्शित  करना  ..चुकी तकनिकी रूप से दूसरे देश जैसे अमेरिका, फ्रांस, इंग्लॅण्ड भारत से आगे हैं इसलिए आज तक हम उन्ही की Geospatial तकनिक का सहारा लेते आ रहे थे, इसमें हमारी, भोगोलिक, सामरिक, क्षेत्रीय अथवा सुरक्षा स्थानों आदि सभी की जानकारी सम्मिलित रूप से इस के दायरे सम्मिलित थी ..अब ये उनपर निर्भर करता था/है की वो किस प्रकार से इन जानकारियों की हमसे, हमारे मित्र राष्ट्रों अथवा दुश्मन राष्ट्रों से साझा करते है
साथ ही संचार अथवा मार्गों की जानकारी देने वाले उपकरण भी अभी तक विदेशी साधनों पर ही निर्भर रहते थे, जैसे की मोबाइल के एप  जिनमे गूगल मैप, वर्ल्ड मैप आदि सभी सम्मिलित है और जो भी जानकारी वो लोग देते हैं उसी पर उसका उपयोग करने वाले निर्भर रहता है , अब अगर उनके द्वारा हमारी किसी क्षेत्रीय जानकारी में बदलाव अगर कर दिया जात है तो हम भी उस पर निर्भर रहेंगे और हमारे निर्णय भी ..यह स्थिति आपातकाल अथवा युद्ध में हमारे लिए बहुत ही खतरनाक साबित हो सकती है इसके विपरीत अगर हमारे देश में ही विकसित Geospatial सूचना उपलब्द है तो हम आत्मनिर्भर हो सकते है ..इस बात को आम आदमी इस प्रकार से भी समझ सकता है की  ISRO (भारितीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन) ने स्वदेश में विकसित “भुवन” हमारे देश में पास उपलब्ध है तो हम यह पता कर सकते है की अमुख सुविधा देने वाली विदेशी तकनीक सही सूचना दे रही है अथवा गलत अथवा मान लीजीये किसी राष्ट्र के साथ युद्ध हो जाए , और हमारे पास विदेश पर निर्भर Geospatial सूचना है, तो हमारी सारी रक्षा एवं सामरिक गतिविधि, उसी पर आधारित होगी, और अगर मान लिया जाय की हमारा दुश्मन उस सूचना में बदलाव केर दे,  तो हमारा समस्त सामरिक समनवय नष्ट हो जायेगा, और हम निश्चित रूप से मात खा जायेंगे, छोटे रूप में अगर हमारे मोबाइल फ़ोन हमे गलत सूचना देदे तो हम कहाँ के जाने कहाँ पहुँच जायंगे और इसके  Geospatial  तकनीक आने वाले दिनों में बहुत बड़े बाज़ार के रूप में भी विकसित होने  रही है, जिसमें कृषि, सूचना, संचार, तेल-गैस, वातावरण, जंगल, आधारभूत ढांचा सुविधाएं, सुरक्षा आदि सभी क्षेत्रों की इस तकनीक पर निर्भरता बढती जायेगी हाल ही में  एक अनुमान के अनुसार 2010 से यह बाज़ार 3944 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष के साथ आगे बढेगा और अगर इस बाज़ार पर भारत सरकार का नियंत्रण होगा तो हमारे लिए आर्थिक रूप से भी लाभदायक होगा.
अब इस बात के अन्य परिलक्षित आधार भी है जैसे हमारे मानचित्र में जम्मू और काश्मीर को भारत वर्ष का ही हिस्सा दिखाया जाता है किन्तु पाकिस्तान उसे नहीं मानता और चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत में नहीं मानता, अब अगर मान लें की गूगल को भारतीय मानचित्र दिखाना है तो उसे हमारे कानून की पालना करने पड़ेगी लेकिन इन दो क्षेत्रों को वो किस प्रकार से दिखायेगा? जिसे लेकर पकिस्तान ने UN में भी गुहार लगायी है की भारत सम्पूर्ण काश्मीर को अपने हिस्से में बताकर अंतर्राष्ट्रीय कानून का उलंघन कर रहा है क्योंकि UN में जम्मू कश्मीर का पकिस्तान अधिग्रहित क्षेत्र विवादित क्षेत्र में आता है साथ ही चीन अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा नहीं मानता वो इसे विवादित क्षेत्र मानता है और अब इसे किस प्रकार से गूगल अथवा दुसरे माध्यम प्रस्तुत करेंगे, और दूसरा मानलीजिये स्कूलों में अध्ययन के लिए बनाये जा रहे मानचित्रों में कोई त्रुटी हो जाए तो उसके लिए इतनी बड़ी सजा का प्रावधान ....कुछ तर्क संगत नहीं लगता.. साथ ही अगर किसी मानवीय अथवा तकनीकी त्रुटी की वजह से कमी रह जाय तो उस पर भी इतनी बड़ी सजा कुछ ठीक नज़र नहीं आती जिसके लिए कानून में कुछ प्रावधान होने की आवश्यकता है ....